माँ का स्त्रीत्व

– प्रोफ़ेसर बलराम सिंह

पुरुष का एक बुद्ध बनना,

ऐसा अंतरयुद्ध क्यों?

नारी की मातृत्व शक्ति,

बुद्ध पे भी भारी क्यों?

स्त्री का बुद्ध होना,

क्यूँ सरल है…?

नारी से एक नर बनाना,

ज्यूँ सरल है…।

रात के सन्नाटे में,

गौतम चला,

कितनी पीड़ा ग्रसित,

वो होगा भला!

(Prof. Singh with his mother during her visit in America)


छोड़कर वो राज वैभव,

अगम राह पे चल पड़ा। 

सुख के साधन त्याग कर,

पग मार्ग तप निश्छल धरा।

नारी का स्व विकट पथ,

स्वतः दिखता क्यूँ नहीं?

नर की भी मार्मिक व्यथा,

प्रायः दिखती क्यूँ नहीं?


पुरुष को पुरुषार्थ का,

पुण्य मिलता कर्म से। 

नारी के पुरुषार्थ का,

आधार ही है जन्म से। 


नारी का तो जन्म ही,

बस देवी का संयोग है। 

दायनी संसार की,

एक माँ उसी का योग है। 

माँ का जीवन ही,

तपस्या स्रोत है। 

उसके बलिदानों से,

जगोत प्रोत है। 


इस तपस्या त्याग का,

जो त्याग कर। 

नारी सन्नाटे में,

घर से भागकर।


निकले जब नारी,

कहीं चुपके से वो। 

लगता स्वाभाविक,

हैं पग भटके से वो। 

रात सन्नाटे में घर,

शान्ति  से बैठी रहे। 

घर में उसके पुरुष बच्चे,

सभी ही सनमुख रहें।

(Prof. Singh’s Mother while attending Shrimadbhagvat Katha in her Village)


उनकी शिक्षा दीक्षा,

उसका सत्य है।

क्यों?

माँ का माँ होना,

सनातन सत्य है।

क्या

माँ को केवल माँ,

बने रहना सरल है ?

नारी के नारीत्व में,

क्या माँ गरल है?

नारी की तप यात्रा,

होती है माँ के द्वार तक। 

जिसको ये भाए नहीं,

ना पहुँचे सत्य के द्वार तक। 

क्योंकि,

सत्य ने कभी सत्य की,

क्या खोज की?

सत्य पे लांछन कहीं,

चिपके कभी?


शब्द का लांछन,

अगर नारी पे है। 

कर्म के कंचन की,

माँधिकारी भी है। 

शब्द तो बस शब्द हैं,

माँ बैखरी के त्रोण में। 

हर किसी भी बाण का,

उत्तर  हैं उसके कोश में। 


इसलिए,

क्या कभी सोचा?

कि स्त्री को,

बुद्ध सा बनना ही क्यों?

घर में बैठे डंका जिसका,

सत्य का बजता है यों। 


पिता पर संदेह भी,

पर माँ पे शक होता नहीं।

वो धरा सी धैर्यशीला,

कोई शक होता नहीं। 

क्या  है वो स्त्रीत्व?

स्त्री जो परिभाषित करे।

त्रिगुण  का  सामंजस्य,

जिसमें स्वतः नैसर्गिक बहे। 


स्त्री ही सत्व, रज, तम,

है खिलाती गोद में।

उस का बस कुछ अंश ही,

बुद्ध पाता बोध में।


फिर से पूछें,

स्त्री को बुद्ध बनना,

क्यूँ सरल है?

फिर से सोचें, स्त्री को?

स्त्री को बुद्ध बनना,

यूँ सरल है।

– Prof. Bal Ram Singh, Director, Institute of Advanced Sciences, Dartmouth, MA, USA