स्वतंत्रता भारत की सतता

– प्रोफ़ेसर बलराम सिंह

इंग्लिश में है इंडिपेंडेन्स, 

उर्दू में आज़ादी;

अपनी भाषा स्वतंत्रता की, 

दिल मानवतावादी। 

इन का मतलब इन्साइड से,

अर्थ आत्म बल वाला;

डिपेंडेन्स से निर्भरता की,

सभी पिरोएँ माला।

आत्मनिर्भर, इंडिपेंडेन्स,

दोनो जुड़वा भाई;

अर्थ समझ में आ जाये,

फिर कोई नहीं लड़ाई। 

आज़ादी कुछ और बात है,

ज़ादी ज़द से बनता;

ज़द का अर्थ पिटाई होती,

जग ही पीड़ित रहता। 

आज़ादी पीड़ित लोगों की,

है गुहार कहराई;

इसमें रोष ग़ुबार बड़ा है,

बोले और लड़ाई। 

स्वतंत्रता स्वावलम्बन है,

नींव आत्मनिर्भरता;

ऐसा तंत्र स्वयंभू बनकर,

जन कल्याणी बनता। 

भारत की मिट्टी से ऐसी,

परम्परा में जान है;

इसीलिए भारत की गरिमा,

जग में बनी महान है। 

भारत में तो भा का रत है,

भा सूरज की कांति है;

जहाँ के लोग सृजन में रत हों,

वहीं वास्तविक शांति है। 

भारत का ये वैदिक दर्शन,

कला ज्ञान विज्ञान है;

इसी का अनुयायी जग सारा,

भारत तभी महान है। 

विषरि गए ये प्रथा हम अपनी,

चक्रवर्त सम्राटों की;

रक्षा वाट जोहती वसुधा,

हमीं पथिक उन वाटों की। 

स्वतंत्रता दिवस ये पावन,

उसी प्रथा की शान है;

आओ मिल संकल्प लें फिर से,

स्वतंत्रता सम्मान है।

– Prof. Bal Ram Singh, Director, Institute of Advanced Sciences, Dartmouth, MA, USA

हमारा सपना ‘आत्मनिर्भर भारत’

डा. अपर्णा (धीर) खण्डेलवाल

माननीय प्रधानमंत्री के “आत्मनिर्भर भारत” मंत्र को जन-जन तक फैलाना है।

नूतन संकल्प-शक्ति के साथ इसे, नूतन पर्व के रूप में मनाना है,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥१॥

आत्मबल से गुँथा हुआ, आत्मविश्वास से भरा हुआ।

आत्मनिर्भर भारतीय से ही, विश्वपटल पर भारत को चमकाना है,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥२॥

दिखा दो हे भारतवासियों! अपनी लग्न और कुशलता।

कर्मठता की पराकाष्ठा से ही होगा, सपना आत्मनिर्भर बनने का पूरा,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥३॥

अर्थ-केंद्रित समाज को मानव-केंद्रित बनाना है।

वैश्वीकरण का रूप बदलकर, विश्व को भारत के रंग में ढालना है,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥४॥

जीव मात्र का कल्याण जिसकी संस्कृति का चिंतन।

ऐसे भारत के संस्कार, जीवन-पद्धति में लाना है,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥५॥

विश्व-प्रगति और कल्याण जिसके ध्येय में हो ध्यान।

ऐसे भारत ने पढ़ाया, “वसुधैव कुटुम्बकम्” का पाठ,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥६॥

सुख, संतोष, सशक्त है, आत्मनिर्भरता के प्रतीक।

सजग भारत का सपना, इसी से पूरा करना है,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥७॥

ग्रामीण विकास से लेकर “Make in India” के द्वारा।

“Quality products” से “Supply-chain” को मजबूत करना, है भारत का दावा,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥८॥

“Vocal for Local” ज़रूरत नहीं, ज़िम्मेदारी है|

गर्व से प्रचार करो, Local को Global बनाने के लिये,  

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥९॥

अर्थव्यवस्था के पांच स्तम्भों (इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम, डेमोग्राफी और डिमांड) पर खड़ा यह नया भारत।

रफ़तार से आधुनिकता के साथ, युवा ऊर्जा से सम्पन्न, भारत है डिमांड का क्षेत्र,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥१०॥

इन्हीं सपनों को साकार करने खड़ा हुआ है भारतवंश।

उम्मीद की किरण लिये गरिमामय है भारतवर्ष,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…..बनाना है॥११॥

छोटे से जीवाणु ने समस्त विश्व को किया है त्रस्त।

संकट के इस दौर से, उभारना है विश्व को,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…….बनाना है॥१२॥

ठान ले तो, कोई राहा, कोई संकल्प मुश्किल नहीं।

इस अवसर से हो सके तो, पुनः बना लो भारत को “सोने की चिड़िया”,

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है…….बनाना है …..बनाना है॥१३॥

Dr. Aparna (Dhir) Khandelwal, Assistant Professor, School of Indic Studies, INADS, Dartmouth