2020 की दस्तक की दास्तां….

डा. अपर्णा (धीर) खण्डेलवाल

उमंग से आए 2020 ने जब दस्तक दी…..

तब नवीन जीवन, नई उमंगों, नई उम्मीदों का सवेरा दिखा।

जनवरी से फरवरी तक सरकते-सरकते, एक नया सा जीव दिखाई पड़ा….

यह कैसा जीव था, जिसकी ना राह पता….ना मंज़िल।

जनजीवन कर दिया ठप, उगी यह कैसी किरण….

इंसानियत तो पहले से ही, बंद थी…..इंसान भी अब हुआ बंद।

मार्च-अप्रैल आते-आते घर बने पिंजरे….

और घुट रहे, पक्षी हुए आज़ाद।

Source of Image : https://www.thehindubusinessline.com/opinion/quick-take/making-a-circus-of-a-global-pandemic/article31141986.ece

घूमना-फिरना छोड़कर, खेल-खेल में सीखे कई नए अंदाज़….

ज़िंदगी की चुलबुलाहट को, करीब से समझा सब ने आज।

कई घरों में उजाला, तो कई घरों में अंधेरा दिखा….

कहीं दूर हुए दिल…करीब हुए, तो कहीं करीबी दिल…दूर हुए।

कई चेहरों पर मुस्कुराहट दिखी, तो कई चेहरों पर आंसू…..

कई घरों से किलकारियां सुनाई पड़ी, तो कई घरों से दहाड़े।

मई-जून की इस रफ्तार को, पकड़ा जुलाई-अगस्त ने……

त्योहारों की गूंज ने महकाए, कितने रास्ते।

ना चाहते हुए भी सजे बाज़ार, उमड़ी भीड़ भी….

पर ना थी अब वो रौनक, और ना था अब वो प्यार।

Source of Image : https://www.livemint.com/news/india/overcrowding-in-festive-season-pollution-causing-rise-in-cases-experts-11603982599374.html

मास्क लगाए उमड़ा था, जनसैलाब….

खौफ को गले लगाएं, पटरी पर सरक रहा था जीवन।

अब ना सावन के झूले थे, ना राखी की वो मिठास….

‘गणपति बप्पा मोरिया’ रह गया, बस बनकर घर की बात।

गरबे की वो धूम, दुर्गा का शक्तिमान स्वरूप…..

पंडालों की जगमगाहट से पहुंचा, virtual platform पर खूब।

डर को समेटे हुए, खुशियों को बिखेरते हुए….

बढ़ रहा था सितंबर-अक्टूबर।

दीयों की रोशनी लिए खड़ा था, दिवाली का त्यौहार…

शहनाइयों की गूंज लिए, सज रहा था नवंबर।

दिसंबर के आते ही, मन में खुशी की लहर फिर से दौड़ी….

लगने लगा, बस यही था 2020 का सिलसिला और कड़ी।

पीछे मुड़कर देखा, तो पता चला….

कितने अस्तित्व इस साल दफ़न हुए और कितने जले।

इस साल ना शादियों की धूम रही, ना रही बैंड बाजे की आवाज़….

ना जन्म का स्वागत हुआ, ना मरण का शोक।

Source of image : https://timesofindia.indiatimes.com/home/sunday-times/covid-19-is-making-the-big-fat-indian-wedding-smaller-and-leaner-survey/articleshow/78850910.cms

होड़ थी, बस खुद को बचाने की… 

और इसी दौड़ में मिल गया समय खूब, खुद को समझने का।

निराशा से भरे इस साल ने दिखाए, जीने के अनेक नए रास्ते….

‘संतोष’ ही है असली वैभव, अच्छे जीवन के वास्ते।

दबे पांव आए, अनेक रूपों में अवतरित होते हुए 2020 ने…..

कई मायनों में अपने-पराए का भेद समझाया।

पटरी से उतर रहे जीवन को…..

फिर से पटरी पर ठहराया।

जो तो यह समझ पाए, उन्होंने खुशी से 2020 को अपनाया….

जो ना समझ पाए, उन्होंने गम से 2020 को गवाया।

कई संवेदनाओं को लिए, कई हौसलों को दिये जा रहा है 2020…..

समय की चौखट पर, दस्तक देने जा रहा है 2021

2020 की सीख को लिए निरंतर बढ़ रहे हैं हम….

गति जीवन की सदा निर्बाधित रहे, प्रार्थना करते हैं हम।

Dr. Aparna (Dhir) Khandelwal, Assistant Professor, School of Indic Studies, INADS, Dartmouth

6 thoughts on “2020 की दस्तक की दास्तां….

  1. बहुत ही बढ़िया कविता है। जीवन में समस्याएं तो आती ही हैं। यदि बाधाएँ आएं, तो हमारे अंदर इतनी शक्ति अवश्य हो, कि हम उनका सामना कर सकें।

    Liked by 1 person

  2. Reflection on year 2020
    Dear Dr. Aparna ma’am. Your year ending composition in the form of poetic statement seems like a long saayari.
    A creative way of summerising the year-2020 . An optimistic poem to send off the year for a fruitful post corona 2021.
    The happenings in various months of 2020 are nicely arranged and reflection of a poetic soul is truely taking shape in you which, in due course of time, will prove its presence in a bigger and louder Shape.
    Congrats.

    Liked by 1 person

  3. शब्दों के मोतियों क़ो,
    सजाया है तुमने ।
    विचारों की शृंखला को,
    संजोया है तुमने।।
    जीवन की असलियत को ,
    उभारा है तुमने।।
    यही तो जीवन है,
    जताया है तुमने।।
    🕉चरैवेति चरैवेति 🕉

    Liked by 1 person

  4. (Comments received via Wats App)

    Bahut Sunder 👍👍👌👌
    by – Dr. Sushma Choudhary

    Ati Sunder
    by – Dr. Shashi Tiwari

    Congratulations! Dear Aparna, It is a beautiful poem.Wish you all the best.
    by – Dr. Dharma

    Wonderful, like a summation in Valedictory Session.
    by – Mr. A.V. Gaikwad

    Very well composed!
    by – Dr. D. Parashar

    Excellent feelings.
    by – Dr. (Brig.) JS Rajpurohit

    Wah kya likha hai Aparna!
    Zindagi ki asliyat words mei kitni khoobsurti se bayan kari hai.
    by – Mrs. Usha Wadhwa

    Amazing poem Aparna 😊
    by- Ms. Radhika Chopra

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