वैदिक ज्योतिष, अपने आप में एक पूर्ण विवादित प्रश्न !!

-Mr. Kanuj Bishnoi, General Secretary, Advanced Research Organisation of Micro Astrology (AROMA)

KBMr. Bishnoi did Vedic Acharya as Guru-Shishya Parampara in Jodhpur, Rajasthan. He worked towards expanding his knowledge in divine science of Vedic Astrology, formulated a five-rule theory of Vedic Astrology, conducted workshops on understanding the various important aspects in life through Vedic astrology and also on ancient Bhrigu-Nandi Nadi Samhita. Honored by many organizations as a Vedic healer & Vedic Vaastu expert. He is visiting professor of many Astrological institutions in major Indian cities and has published several articles in Jyotish magazines & journals.

वैदिक ज्योतिष जैसे गूढ़ विषय पर लाखों लोगों की अपनी-अपनी विवादित राय है कई लोगों की दृष्टि में ज्योतिष सिर्फ भ्रम फैलाने का कार्य है, कई लोगों की दृष्टि में लोगों को ठगने का माध्यम तो कई लोगों की राय में यह कोई विद्या ही नहीं है, सिर्फ भ्रामकता है, तो कई लागों की राय में यह एक परिपक्व एवं शास्त्रोक्त विद्या एवं कुछ लोगो की दृष्टि में समय व्यतीत करने का एक सशक्त माध्यम लेकिन वास्तविकता यह है कि यह एक परिपूर्ण एवं शास्त्र सम्मत विधा है और पूर्ण रूप से नक्षत्रों एव ग्रहों पर आधारित ज्ञान है, जो हजारों वर्षों से विद्यमान है।
सम्पूर्ण जगत के सजीव जीव-जन्तु, प्राणी मात्र एवं समस्त जल, थल, अग्नि, वायु एवं आकाश ये पंच तत्व भी नक्षत्रों एवं ग्रहों द्वारा संचालित होते हैं। इन नक्षत्रों एवं ग्रहों, राशियों का ज्ञान ही ज्योतिष विज्ञान है। हमारे पुरातन वेदों में इसे वेदों के नेत्र कहा गया है न सिर्फ भारतवर्ष में अपितु अन्य कई देशों में वहां के संतों एवं दार्शनिकों ने ग्रहों और नक्षत्रों का अध्ययन कर भविष्य के प्रति अपनी भविष्यवाणियां की हैं। यूनान के प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रोदोनोमस एवं कीरो के नाम से शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा, उन्होंने भी ग्रहों एवं नक्षत्रों का अध्ययन कर भविष्य के प्रति लोगों को सचेत किया है। लंकापति रावण ज्योतिष विद्या का महान ज्ञाता था और ग्रहों की चाल एवं नक्षत्रों के ज्ञान से वह भली-भांति परिचित था एवं जानता कि उसका और उसके परिवार का क्या हश्र होना है। आदरणीय पराशर होरा शास्त्र, भृगु संहिता,रावण संहिता, लाल किताब, ताड़ पत्रों पर लिखा नाड़ी सूत्र इसके जीवंत उदाहरण हैं। इन सबकी सत्यता एवं वर्तमान में होने वाले मानवीय जीवन पर इनके प्रभाव को झुठलाया नहीं जा सकता है। हां, ये बात जरूर है कि वर्तमान भौतिक युग में कई पाखंडियों ने इसे धन कमाने का माध्यम बना लिया है और वो येन-केन-प्रकारेण लोगों को मूर्ख बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। इस कारण लोगों का इस पर से विश्वास उठता जा रहा है यहाँ हमें जरूरत है इस प्रकार के पाखंडियों से बचने की, न कि हजारों वर्षों से चली आ रही हमारी पुरातन शास्त्रोक्त विद्या से किनारा करने की।
ज्योतिष एक सशक्त माध्यम है जीवन जीने का। एक अच्छे ज्योतिषी की अच्छी राय से हम न सिर्फ भविष्य के प्रति सचेत हो सकते हैं, बल्कि हमारे जीवन की आगामी रूपरेखा भी तय कर सकते हैं। आज वर्तमान समय में दुनिया बहुत तरक्की कर चुकी है, व्यापार, अध्ययन एवं धन कमाने के कई नये द्वार खुल चुके हैं। एक अच्छे ज्योतिष की सलाह से हम उचित एवं हमारे ग्रह-नक्षत्रों के हिसाब से अनुकूल व्यापार, विद्या या नौकरी का चयन कर सकते हैं। यहां पर नकारात्मक विचारधारा एवं ज्योतिष को संदेह की दृष्टि से देखने वाले यह कह सकते हैं कि जो होना है वही होगा, चाहे कितना ही प्रयास कर लीजिये, भाग्य से अतिरिक्त कुछ नहीं होगा। मुझे उनकी उक्त बात से नाइत्तफाकी नहीं है अपितु मैं भी इस बात का समर्थन करता हूं कि जो होना है वही होगा। भाग्य का लिखा टल नहीं सकता है, लेकिन मैं ये भी कहना चाहता हूं कि मात्र भाग्य के सहारे तो हाथ पर हाथ रख कर बैठा नहीं जा सकता है। “कर्म तो प्रधान है ही” महाभारत में श्री कृष्ण ने भी यही कहा है कि कर्म प्रधान है, इसीलिए हम अपना प्रयास, अपना कर्म करते रहे।
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जब हम रोग-ग्रस्त हो जाते हैं तो डाक्टर के पास जाते हैं, किसी कानूनी झमेले में फंस जाते हैं तो वकील के पास जाते हैं लेकिन मात्र ये सोच कर कि जो होना है होगा, बैठे तो नहीं रहते। एक डाक्टर भी अपने मरते हुए रोगी को जिसके बारे में वह अच्छी तरह से जानता है कि वो बच नहीं सकता, फिर भी उसकी आखिरी सांस तक वह अपना प्रयास जारी रखता है। एक वकील कमजोर से कमजोर मुकदमे में भी अपने पक्षकार को बचाने हेतु अपनी पूरी ताकत झोंक देता है। जब हम उन पर विश्वास कर सकते हैं तो एक अच्छे ज्योतिषी और ज्योतिष विद्या पर क्यों नहीं? एक अच्छा डाक्टर भी लम्बी-चौड़ी मेडिकल जांचों के बाद ही इस निश्चय पर पहुंच पाता है कि मरीज को क्या एवं किस अंग से सम्बन्धित रोग हो सकता है। लेकिन एक अच्छा ज्योतिषी मात्र आपका जन्मांग  (जन्म समय पर भचक्र में ग्रहों की स्थिति का विवरण) अर्थात जन्म-कुंडली से यह बता सकता है कि व्यक्ति को क्या तथा किस अंग से सम्बन्धित रोग कब होगा तथा वह कब तक एवं किस तरह पूर्ण रूप से ठीक होगा या नहीं होगा। यह भी एक अच्छा ज्योतिषी ही बता सकता है कि मुकदमे में आपकी जीत होगी या हार, वकील साहब सिर्फ मेहनत कर सकते हैं, मुकदमा लड़ सकते हैं, लेकिन हार-जीत का फैसला मुवक्किल की स्वंय की किस्मत पर है, जो आपको सिर्फ एक अच्छा ज्योतिषी ही आपका जन्मांग देख कर बतला सकता है।
ज्योतिष एक महान विधा तो है ही, बल्कि इसे जीवन जीने का एक प्रबल सहारा भी जानना चाइये । यह इन्सान को जीने का सहारा प्रदान करता है उसे भविष्य के प्रति सचेत करता है, उसको जीने के प्रति एक आस बंधाता है। जब हम किसी परेशानी में होते है या जीवन के बुरे समय से गुजर रहे होते हैं तो किसी ज्योतिषी की शरण में जाते हैं और ज्योतिषी हमारा जन्मांग देखकर बताता है कि इतना समय आपका खराब है, उसके बाद यह परेशानी खत्म हो जायेगी तो उसके इतना कहने और इस आस एवं उम्मीद में कि कुछ समय की बात है, यह समय भी सत्कर्म करते हुए निकल जायेगा और इसके बाद हमारा अच्छा समय आयेगा, यही आस से हमारे में जीने की और उस समस्या से रूबरू होने की शक्ति एकत्रित करने लगती है और हम चाह कर भी कोई गलत कदम या गलत फैसला नहीं लेते। अब बताईये इससे अच्छा और जीवन जीने का सहारा क्या हो सकता है? एक विद्वान ज्योतिषी की अच्छी राय से हम हमारे भविष्य की रूपरेखा बना सकते हैं।हमारे बच्चों को उनके ग्रह अनुकूल क्षेत्र में भेजकर उनका भविष्य उज्जवल बना सकते हैं। अल्प समय के लिए आयी हुई परेशानियों को टाल कर पारिवारिक विघटन से बच सकते हैं तो फिर इस विद्या या इसके जानकारों पर भरोसा क्यों नहीं कर सकते?
आज बड़े से बड़े क्षेत्र और अनेको राष्ट्रों में ग्रहों और उनसे मानव जीवन पर पडऩे वाले प्रभाव और सृष्टि के विकास में उनके योगदान पर अनवरत अध्ययन एवं अनुसंधान जारी है। अमेरिका के नासा तक में हजारों वैज्ञानिक रात-दिन खगोल शास्त्र अर्थात एस्ट्रोनोमी के अन्तर्गत ग्रहों एवं नक्षत्रों के प्रभावों का अध्ययन एवं अनुसंधान कर रहे हैं। स्वंय हमारे देश के माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फैसले में इसे विज्ञान माना है और उसी की बदौलत आज हमारे देश में कई यूनिर्वसिटीज ने इसे अपने पाठ्यक्रमों में शामिल किया है। आज कई विश्वविद्यालयों में इसके कोर्स एवं उपाधी कार्यक्रम चल रहे हैं। अत: ज्योतिष को पूर्णतया विज्ञान सम्मत वैदिक विधा जानना चाइये । इसमें किसी प्रकार की शंका की कोई आवश्यकता नहीं है बल्कि मैं तो यहां तक कहना चाहूंगा कि प्रत्येक इंसान का प्रत्येक परिवार का जिस प्रकार पारिवारिक डाक्टर, पारिवारिक वकील, पारिवारिक कर सलाहकार होता है, उसी प्रकार एक पारिवारिक ज्योतिषी भी होना चाहिये, जिससे कि समय-समय पर हम जानकारी लेकर भविष्य के प्रति हमारा मार्ग प्रशस्त कर सकें ।
आज अधिकतर सोशल साइट्स जैसे फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सअप आदि पर कॉपी-पेस्ट करके अपने को बड़ा ज्योतिषी सिद्ध करने वालो की बाढ़ आई हुई है और ये पोस्ट्स जन-सामान्य तक पहुंचती है इनमे वर्णित ज्योतिष की ऊंटपटांग व्याख्या एवं उपायों से समाज को गलत सन्देश जाता है । इस कारण समाज और ज्योतिष को जो हानि पहुंच रहीं है उसका कोई हिसाब रखने वाला ही नहीं है । ये सही है कि “ज्योतिषी भी शिक्षक, चिकित्सक और वकील जैसा और सही कहूँ तो जनसामान्य के लिए इन सबसे अधिक उपयोगी है” लेकिन कोई भी चिकित्सक, वकील, टीचर यदि फर्जी डिग्री लेकर इसको अपना व्यवसाय बनाता है तो वो अपने क्लाइंट के जीवन से खिलवाड़ के साथ-साथ उस से बेईमानी तो करता ही है लेकिन व्यवसाय को भी बदनाम करवा कर उसके साथ “नकली” शब्द और जुड़वा देता है। अन्य तीनो व्यवसायों की नियमन संस्थाएं जैसे मेडिकल काउन्सिल, बार काउन्सिल, शिक्षा परिषद आदि है जो सरकार की निगरानी में चलती है एवं उनमे जालसाजी करने पर दंड का प्रावधान है। उसी प्रकार क्या ज्योतिषी को समाज में आ कर अपने उपाय बताने से पहले किसी नियमन संस्था के अंतर्गत नहीं आना चाहिए ? और यदि कोई इसमें फर्जीवाड़ा के द्वारा प्रवेश कर जनसामान्य के जीवन से खिलवाड़ करता है (जो कि इस समय नब्बे प्रतिशत से अधिक कथित ज्योतिषी कर रहे है) तो उसको क़ानून के अंतर्गत लाकर कठोर दंड का विधान क्या नहीं होना चाहिए ?
आज वैदिक ज्योतिष को अधिकतर “कथित ज्योतिषी” धार्मिकता और पाखंड से जोड़कर एवं इससे भयभीत करके अपनी दुकानदारी चला रहे है । यदि वैदिक ज्योतिष को उसका उचित सम्मान दिलवाना है और उस से जन-सामान्य अधिकाधिक लाभ प्राप्त कर सके इसके लिए अत्यन्त आवश्यक है कि ज्योतिष को व्यवसाय बनाने से पहले एक नियामक संस्था हो जो प्रमाणित करे कि ज्योतिषी नियमानुसार व्यवसाय के लिए उपयुक्त है एवं यहाँ पंजीकृत किये बिना कोई भी ज्योतिष को व्यवसाय ना बन सके इसके लिए एक नियामक संस्था के गठन हेतु सरकार से मांग की जानी चाहिए।
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4 thoughts on “वैदिक ज्योतिष, अपने आप में एक पूर्ण विवादित प्रश्न !!

  1. यह लेख एक विचारणीय विषय को प्रस्तुत करता है, जो रोचक और सरल शब्दों में लिखा गया होने से सभी के लिए
    पठनीय है।

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  2. ज्योतिष की वास्तविकता को द्योतित करने वाले इस लेख के लिए बिश्नोई साहब को हार्दिक आभार । वस्तुतः यह बात अकाट्य है की ज्योतिष में लग्नादि द्वादश भावों की समीक्षा वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर हुई है और इसमें सौरमण्डल का चित्र विद्यमान रहता है । यह कल्पना नहीं अपितु खगोलशास्त्र की देन है । गणितागत ग्रहों की आकाशीय स्थिति यथास्थान इस द्वादश भावात्मक ग्रह कुण्डली में दृश्य होती है । लेखक के इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ कि ज्योतिषशास्त्र को भी एक नियामक संस्था के अंतर्गत लाना चाहिए । संस्कृत एवं भारतीय साहित्य में अनुशासन की एक सुदृढ़ परम्परा रही है तभी इसकी जड़ें आज भी मजबूत हैं ।

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  3. आदरणीय डॉ शशि तिवारी जी , डॉ धनंजयमणि त्रिपाठी जी एवं अमित जी,,
    लेख की व्याकरण त्रुटियों को क्षमा करते हुए आपने जो उत्साहवर्धन किया है उसके लिए मैं आभारी हूं!
    आपके शब्द हमे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है!!
    धन्यवाद

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